जानिए किस वजह से सबसे ऊंचे किले पर बने मंदिर की मां कहलाई जाती है गढ़वाली माता

  • 02 Oct 2019
  • Reporter: पी. चंद, शिमला

नवरात्र के शुभ मौक़े पर आजकल मंदिरों में खासी भीड़ देखने को मिल रही है। जोगिन्दरनगर से कुछ ही दूरी पर मंडी और कांगड़ा जिले की सीमा में मंडी -पठानकोट सड़क में एहजू गांव के ठीक ऊपर सुन्दर पहाड़ी में मां माहेश्वरी देवी का भव्य मंदिर स्थित है। इस मंदिर के पास राजा के समय का एतिहासिक किला भी है जिसके प्रमाण मंदिर के आसपास मौजूद हैं। इस मंदिर की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है।

चारों ओर से चीड़ के घने पेड़ो से घिरे गड़ा माता यह मंदिर राजा के समय का माना जाता है। मंदिर के परिसर में ही एक ऐतिहासिक किला भी है। जहां राजवंश के समय के दो गढ़ भी मौजूद हैं जिसके कारण मां को गढ़ वाली मां के नाम से जाना जाता है। लेकिन रख रखाव के अभाव में आज यह किला खंडहर बनता जा रहा है।

इस मां के मंदिर के बारे में माना जाता है कि एक बार की  एक ब्राह्मण जिसका नाम मनी राम था उसे स्वप्न में देवी ने दर्शन दिए और कहा कि वह जमीन के गर्भ  में मूर्ति के रूप में गड़ी हुई है। इस मूर्ति को निकालकर मौजूदा समय मे बने  मंदिर में स्थापित करने का हुक्म दिया गया। जब स्वप्न की ये बात पंडित मनी राम ने  गांव वालों को बताई । उसके बाद सभी गांव वाले बताए गए स्थान पर गए और खुदाई के बाद  देवी की मूर्ति को जमीन के अंदर से निकाल लिया।  

इसके बाद सभी गांववासियों ने देवी की स्थापना की और पूजा अर्चना शुरू कर दी। उसके बाद मंदिर का निर्माण किया गया था वहां राजा जोगिन्दर सेन के समय के दो गढ़ भी हैं इसी कारण मां को गढ़वाली मां के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर परिसर में बहुत ही गहरे कुंए भी मौजूद है। इस मंदिर से चारों ओर का नज़ारा बहुत ही सुन्दर दिखता है। पैराग्लाइडिंग के लिए विश्व विख्यात सुन्दर घाटी, बीड़ भी यहां से दिखाई देती है। लडभड़ोल क्षेत्र का नज़ारा भी यहां से दिखाई देता है। नवरात्रों के दिनों में आजकल यहां खूब भीड़ लगी हुई है। आसपास के लोगयहाँ आकर मन्नत मांगते है और पूरी होने पर बाजे गाजे के साथ जातर लेकर आते है।  श्रद्धालु मां की पूजा अर्चना करने के साथ ही आशीर्वाद लेकर धन्य हो जाते हैं।