हमीरपुर के बैंबू आर्टिस्ट करतार सोंखले पदमश्री अवार्ड के लिए चयनित, परिवार में खुशी का माहौल

  • 26 Jan 2021
  • Reporter: जसबीर कुमार, हमीरपुर

जिला हमीरपुर के करतार सोखंले को पदमश्री अवार्ड के लिए चुने जाने से उनके घर में खुशी का माहौल है। सोमवार देर शाम को केन्द्र सरकार ने इनके नाम की घोषणा की है। करतार सोंखले जिला के नौहंगी गांव के रहने वाले फेमस बैंबू आर्टिस्ट हैं। मार्च माह में वह एनआईटी हमीरपुर से स्वास्थ्य विभाग से वरिष्ठ फार्मासिस्ट के पद से सेवानिवृत हुए है। करतार सोंखले को बचपन से ही कुछ अलग करने का शौक रहा है। वर्ष 2000 में मन में उठे एक शौक के चलते शीशे की बोतल में बांस से एक डिजाइन तैयार कर दिया और उसके बाद सिलसिला जारी रहा है। अब तक सैकंडों बोतल में विभिन्न कलाकृतियां बनाकर तैयार की हैं जिनको देखकर लोग काफी प्रशंसा करते हैं। हालांकि करतार सिंह की कलाकृतियों की प्रदर्शनी प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भी लगा चुके हैं। जहां पर हर किसी द्वारा इसकी सराहना की गई है।

बैंबू आर्ट की कलाकारी कर करतार सोंखले ने शीशे की बोतल में ऐसी-ऐसी कलाकृतियां बनाई है कि जिन्हें देखकर हर कोई दंग रह जाता है। चाहे अस्तित्व खो रही धरोहर हो या फिर चीजें या फिर मंदिर या मशहूर टावर इन सभी को करतार सिंह सौंखला ने अपनी कला से बोतल के अंदर कैद कर दिया है। अभी हाल ही में लॉकडाउन के दौरान करतार सिंह सौंखला ने पीएम मोदी, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, पूर्व राष्ट्रपति अब्बदुल कलाम के अलावा साईं राम, शिव परिवार की मूर्तियां बोतल में बना डाली है जिन्हें देखकर हर कोई हैरान रह जाता है।

करतार सोंखले ने बताया कि उन्हें फोन पर जैसी ही सूचना मिली तो वह काफी खुश हुए। काफी समय से उन्हें इसका इंतजार था जो अब जाकर पूरा हुआ है। उन्होंने बताया कि कलाकृतियां बनाने का शौक बचपन से रहा है। लेकिन लॉकडाउन के चलते प्रधानमंत्र मोदी और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के अलावा भी कई कलाकृतियां बनाई हैं। इन्हें घर पर ही बांस के सामान से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि बैंबू आर्ट युवाओं के लिए स्वरोजगार के रूप में विकसित किया जा सकता है और सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। हिमाचल में टूरिस्ट आते हैं तो सरकार अगर बैंबू निर्मित कलाकृतियों को बाजार में उपलब्ध करवाती है तो इसे व्यवसाय के रूप में भी अपनाया जा सकता है।  

करतार सोंखले के बैंबू आर्ट को लेकर उनकी पत्नी सुनीता ने बताया कि उनके पति काफी समय से उम्मीद लगाए हुए थे। लेकिन जैसे ही इसी सूचना मिली सारा परिवार खुश है और लगाता है आज उनके पति के काम को सच्ची सराहना मिली है। इन कलाकृतियों को बनाने में खर्चा बिल्कुल नहीं हुआ बल्कि लोगों के द्वारा बेकार समझे जाने वाले बैंबू के साथ शीशे की बोतलों का प्रयोग किया गया। पहले तो इस तरह का काम करना बेकार काम लगता था लेकिन जब लोगों ने भी बहुत सराहना की हौंसला और बढ़ गया। बांस के टुकडे को तराश कर बोतल में कलाकृति बनाना कठिन काम है।

वहीं, उनके बेटे केतन सोंखले ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान उन्हें नई कलाकृतियों को बनाने के साथ ही विभिन्न अवार्ड के लिए अपने नाम भेजे जिससे उन्हें काफी ज्यादा सराहना भी मिली। इससे पहले भी उन्होंने पदम श्री के लिए अपनी कलाकृतियों को नामित किया था मगर आज उन्हें इस अवार्ड की सूचना मिलने से सभी खुश हैं।